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डॉ. मनोज माजी स्टाफ वैज्ञानिक III पीएच. डी.: बोस संस्थान / जादवपुर विश्वविद्यालय, भारत पोस्टडॉक्टोरल फैलो: केंटकी विश्वविद्यालय, लेक्सिंगटन, संयुक्त राज्य अमरीका ईमेल: manoj_majee@nipgr.res.in; majeem@yahoo.co.uk टेलीफ़ोन: 91-11-26735193 फैक्स: 91-11-26741658 |
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| प्लांट मोलिक्यूलर बायोलौजी, बायोकेमिस्ट्री एंड प्लांट बायोटेक्नोलोजी | ||||||||||||||||||
| मोलेकुलर, जेनेटिक एंड बायो केमिकल स्टडी ऑफ़ प्रोटीन L- ISOASPARTYL METHYLTRANSFERASE (PIMT) इन प्लांट्स | ||||||||||||||||||
| अन्य जीवों की तरह, पौधों में, विशेष रूप से बीज में, उम्र बढ़ने या पर्यावरण संबंधी तनाव की वजह से प्रोटीन की सहज क्षति होती है| कई प्रक्रियाओं में से असामान्य आयसोएसपार्टिल अवशेषों के गठन से प्रोटीन का नुकसान होता है| ऐसे अनायास क्षतिग्रस्त प्रोटीन का संचय एक बीज या प्लांट में इसके विकास के लिए हानिकारक हो सकता है| इस तरह ऐसे बदले हुए प्रोटीन की पहचान एवं सुधार करना पौधे की कोशिकाओं में प्रोटीन गिरावट को सीमित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है| एक एंजाइम जो इस प्रक्रिया में भाग लेता है प्रोटीन L- ISOASPARTYL METHYLTRANSFERASE (PIMT) है| PIMT एक प्राचीन एंजाइम है जो पौधों सहित वंशावली डोमेन भर में वितरित है लेकिन यह एंजाइम पौधों में कम अध्ययन किया गया है| पौधों में इस एंजाइम के कार्य को अच्छी तरह से स्पष्ट नहीं किया गया है| हमारी रुचि पौधों में PIMT जीन (ओं) प्रोटीन के आणविक विनियमन और कार्यात्मक महत्व को समझने तथा इसके शोषण जिस से बीज शक्ति, लम्बी आयु ,व्यवहार्यता बढ़ती है और आनुवंशिक जोड़तोड़ के माध्यम से प्लांट स्ट्रेस एडैपटेशन में है| हमारा शोध भी विशेष रूप से बीज में, PIMT substrates/age क्षतिग्रस्त प्रोटीन की पहचान के लिए है| |
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| आयनोसिटोल मेटाबोलिस्म्स इन प्लांट: ए जेनोमिक्स पर्सपेक्टिव | ||||||||||||||||||
| सामान्य और पर्यावरण संबंधी स्थिति में पौधों के अस्तित्व के लिए आयनोसिटोल आवश्यक है| यह केवल पौधों की वृद्धि और विकास को बनाए रखने के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण तनाव के कारण ओस्मोटिक असंतुलन के प्रभाव से भी कोशिकाओं की रक्षा करने के लिए आवश्यक है| इस आयनोसिटोल का उत्पादन रूपांतरण के माध्यम से होता हैं - ग्लूकोज 6- फॉस्फेट टू myo आयनोसिटोल 1- फॉस्फेट बाए द एन्ज़ायेम L- myo inositol 1- phosphate synthase (MIPS) और इसके बाद myo inositol 1 - phosphatase (IMP) मुक्त आयनोसिटोल पैदा करता है| MIPS कोडिंग के अनुक्रम को क्लोन किया गया है और व्यापक रूप से पौधों सहित विभिन्न जीवों से लक्षण वर्णन किया गया है| कुछ पौधों में अनेक MIPS/IMP कोडिंग जीन पाई गई हैं, लेकिन पौधों में इन एकाधिक आयनोसिटोल बायोसिंथेटिक जीन्स के महत्व का अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है| हमारी रूचि पौधों में प्रत्येक जीन के आणविक लक्षण वर्णन एवं उत्परिवर्ती विश्लेषण के माध्यम से अपने कार्यात्मक लक्षण वर्णन के द्वारा आयनोसिटोल बायोसिंथेटिक जीन्स के महत्व को जानने की है| हमारी प्रयोगशाला आयनोसिटोल के बायोसिंथेसिस एवं चयापचय पर और इसके डेरिवेटिव पर केंद्रित है, और कैसे इन प्रक्रियाओं से पर्यावरण तनाव के अंतर्गत पौधों के फिजियोलॉजी पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ता हैं| |
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| मोलेकुलर जेनेटिक एंड बायोकेमिकल स्टडी ऑफ़ Ubiquitin /26S Proteasome पाथवे इन सीड फिजियोलॉजी एंड प्लांट स्ट्रेस एडैपटेशन | ||||||||||||||||||
| प्लांट ग्रोथ, डेवेलोप्मेंट और पर्यावरण संबंधी रूपांतर ज्यादातर अल्पकालिक विनियामक प्रोटीन के चयनात्मक रेमोवल द्वारा नियंत्रित है| Eukaryotes में इन विनियामक प्रोटीन को हटाने के लिए एक प्रमुख proteolytic पाथवे हैं - ubiquitin (यूबी) / 26S एंटीबॉडी पाथवे| पौधों में, यह पाथवे कई अलग-अलग सेलुलर प्रक्रियाओं के नियंत्रण में जैसे की एम्ब्र्योजेनेसिस, हार्मोन संबंधी नियम, कुसुमित, senescence, फोटो मोर्फोजेनेसिस, circadian rhythm, रोगज़नक़ प्रतिरोधक क्षमता और पर्यावरण संबंधी एडैपटेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| अराबिडोप्सिस के जीनोम से 1400 (>5% of the proteome) पाथवे घटकों से भी अधिक की एन्कोडईंग होती है जो कि खमीर, ड्रोसोफिला, चूहों और मानव के तुलना में दो बार से अधिक है| क्यों पौधों ने इस प्रोटोलिटिक सिस्टम पर एक विशेष जोर दिया है, ठीक से स्पष्ट नहीं हैं| E3s कैसे विनियमित होते हैं और पौधों में Ub/26S एंटीबॉडी पाथवे के substrates क्या हैं, प्लांट जीव विज्ञान अनुसंधान के लिए बड़े प्रश्नों में से हैं| हमारी प्रयोगशाला का प्रयास बीज जीव विज्ञान और प्लांट स्ट्रेस एडैपटेशन में इस प्रोटोलिटिक मार्ग की भूमिका को स्पष्ट करने का है| बीज जीव विज्ञान और पर्यावरण संबंधी एडैपटेशन में इस पाथवे की क्या विशेष कार्य हैं और किस तरह से इसमें रचनात्मक हेरफेर की जा सकती हैं| |
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