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डॉ. प्रवीण वर्मा स्टाफ वैज्ञानिक IV एमएससी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली पीएच.डी., जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली दूरभाष : 91-11-26741612,14,17 एक्सटेंशन. - 114 सीधा संपर्क - 91-11-26735114 फैक्स: 91-11-26741658 ई-मेल: praveen_verma@nipgr.res.in |
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करियर |
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स्टाफ वैज्ञानिक IV, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (2008-वर्तमान); |
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स्टाफ वैज्ञानिक III, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (2003-2008); |
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स्टाफ वैज्ञानिक II, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (1998-2003). |
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अनुसंधान क्षेत्र |
| प्लांट इम्युनिटी: फंक्शनल जेनोमिक्स ऑफ़ प्लांट-पैथोजन इंटरएकशंस |
पौधों की वृद्धि और अस्तित्व वातावरण में मौजूद पैथोजन्स के लिए उनकी सहिष्णुता पर निर्भर करता है| पैथोजन्स ने भोजन और आश्रय के लिए मेजबान का फायदा उठाने के लिए परिष्कृत आणविक हथियार (सोफिसकेटेड मोलेकुलर वेपन्स) विकसित किये है जबकि पौधों ने उनके खिलाफ एक बहुस्तरीय प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित किया है| एक प्लांट चाहे अतिसंवेदनशील हो या संक्रमण के लिए प्रतिरोधी हो, प्लांट के जीनोटाइप और पैथोजन्स एवं उनके मोड की प्रकृति पर निर्भर करता है| पैथोजन्स ने भोजन और आश्रय के स्रोतों के रूप में पौधों का शोषण करने के लिए सोफिसटिकेटेड मोलेकुलर वेपन्स विकसित किये है, जबकि पौधों ने शस्त्रागार के बड़े संग्रह को विकसित किया है, पैथोजन्स का पता लगाने और सेलुलर सुरक्षा साधनों को सक्रिय करने के लिए|
हम ने एक महत्वपूर्ण फली फसल चना (Cicer arietinum) और इसके विनाशकारी नेक्रोट्रोफिक पैथोजन Ascochyta rabiei (Ascochyta तुषार के कारण एजेंट) को एक प्रणाली के रूप में प्लांट-पैथोजन इंटरएकशंन स्टडी के लिए अपनाया है| मेरी प्रयोगशाला दो अंतर - संबंधित जैविक सवालों पे काम कर रही है:
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- कैसे पौधे कवक (फंगल) आक्रमण के खिलाफ अपने प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रेरित करते हैं?
मेरी प्रयोगशाला की दिलचस्पी रोग की स्थापना के प्रारंभिक चरणों में उनकी भूमिका के लिए विनियामक और संकेतन तंत्र को चित्रित करने में है| हम ने कई जल्दी उत्तरदायी चिकपी जीन प्रतिलेख रूपरेखा नीतियों (ट्रांसक्रिप्ट प्रोफाइलिंग स्ट्राटेजिस) का उपयोग कर अलग किये है, और उनमें से कुछ को निस्र्पक भी कीया जो कि चिकपी प्रेरित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इंडूस्ड इम्यून रेस्पोंस) में उनके कार्यात्मक भूमिका लिए संकेतन और प्रतिलेखन कारकों के लिए संबंधित है| इस प्रक्रिया का प्रोटीन नेटवर्क भी प्रोटिओमिक्स दृष्टिकोण और यीस्ट टू हाईब्रिड सिस्टम्स का उपयोग करके कीया जा रहा हैं| इसके अलावा, हम अगली पीढ़ी के अनुक्रमण नीतियों का उपयोग mRNA की सीक्वेंसिंग और ORFeomes की जेनेरशन के लिए कर रहे है|
- कैसे एक नेक्रोट्रोफिक पैथोजन खुद में तथा प्लांट की कोशिकाओं में हेरफेर कर एक प्रतिकूल वातावरण में उत्पन्न होता है?
नेक्रोट्रोफिक पैथोजन मेजबान के जवाब में और स्वयं द्वारा उत्पन्न ओक्सिडेटिव स्ट्रेस की स्थिति की परवाह किए बिना मेजबान कोशिकाओं को उत्पन्न करते एवं मारते भी हैं| हमारी परिकल्पना है कि नेक्रोट्रोफिक कवक में कुछ जटिल तंत्र होते है जो यह ऑक्सीडेटिव तनाव में जीवित रहने और उपनिवेश स्थापित करने के लिए अनुमति देता है| नए कैंडीडेट जीन के एक पोर्टफोलियो को Ascochyta rabiei से पृथक किया गया है, जिस से कि वाइरुलेंस और पैथोजेनेसिस में उनकी भूमिका का अध्ययन हो सके| इन जीनों के कार्यात्मक विश्लेषण से नए विषैलापन कारकों (वाइरुलेंस फैकटर्स) का और ऑक्सीडेटिव तनाव की स्थिति से निपटने के लिए कवक संक्रमण के आवश्यक प्रक्रियाओं का पता चला है| हम जीनोमिक्स और प्रोटिओमिक्स दृष्टिकोण का उपयोग कर नेक्रोट्रोफिक पैथोजन के लिए विशिष्ट कवक इफेकटर्स देख रहे हैं|
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फंक्शनल जेनोमिक्स ऑफ़ चिकपी - हेलिकोवेर्पा इंटरएक्शंस
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| मेरी प्रयोगशाला की रुचि प्लांट -हेर्बिवोरे इंटरएक्शंस के दौरान इंडूस्ड इम्यून रेस्पोंस के अध्ययन में है| हम निम्नलिखित सवाल संबोधित कर रहे हैं:- |
- हेर्बिवोरे हमले के खिलाफ पौधे कैसे प्रतिरक्षा और प्रतिक्रिया भावना को उत्पन्न करते है?
पौधे दोनों पैथोजन और हेर्बिवोरे हमले का जवाब बनावट और प्रेरित रक्षा तंत्र द्वारा देते हैं| डाइरेक्ट इंडूस्ड डीफेंस रक्षा से संबंधित प्रोटीन अभिव्यक्ति, रीन्फोर्समेंट ऑफ़ सेल वाल, सेकेंडरी कमपाउंड्स के बायोसिंथेसिस, प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (रिऐकटिव ओक्सीजेन स्पिशिस) के उत्पादन के माध्यम से काम करता हैं| चिकपी के प्रमुख खतरों में से एक जेंरलिस्ट हेर्बिवोरे - हेलिकोवेर्पा armigera है जो पौधे के हवाई भागों - पत्ते और फली को नुकसान पहुंचाता हैं| हम ने कई जीनों को अलग कर जटिल रास्ते संकेतन को स्पष्ट करने की कोशिश की हैं - जीनोमिक्स और प्रोटिओमिक्स दृष्टिकोण का उपयोग कर प्रतिरक्षा के लिए|
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| समूह के सदस्य |
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डॉ. कमल कुमार |
एन.आई.पी.जी.आर-पीडीएफ |
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डा. नज़रूल इस्लाम |
रिसर्च एसोसिएट |
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श्री सौरभ यादव |
पीएच.डी. छात्र |
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श्री कुणाल सिंह |
पीएच.डी. छात्र |
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श्री शादाब निज़ाम |
पीएच.डी. छात्र |
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सुश्री संध्या वर्मा |
पीएच.डी. छात्रा |
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श्री मनमोहन सिंह |
पीएच.डी. छात्र |
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सुश्री ज्योति रेड्डी चेरूको |
वरिष्ठ रिसर्च फैलो |
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सुश्री प्रगति कुमारी |
जूनियर रिसर्च फैलो |
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चयनित प्रकाशन |
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Nizam S, Singh, K and Verma PK (2010) Expression of the fluorescent proteins DsRed and EGFP to visualize early events of colonization of the chickpea blight fungus Ascochyta rabiei Current Genetics 56 (4): 391-399. |
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Singh A, Singh IK and Verma PK (2008) Differential Transcript Accumulation in Cicer arietinum L. in Response to a Chewing Insect Helicoverpa armigera and Defense Regulators Correlate with Reduced Insect Performance J. Exp. Bot. 59(9): 2379-2392. |
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Anjanasree KN, Verma PK and Bansal KC (2005) Differential expression of tomato ACC oxidase gene family in relation to fruit ripening. Current Science 89(8): 1394-1399 |
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Boominathan P, Shukla R, Kumar A, Manna D, Negi D, Verma PK and Chattopadhyay D (2004) Long term transcript accumulation during the development of dehydration adaptation in Cicer arietinum L. Plant Physiology. 135(3): 1608-1620. |
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Thakur IS, Verma PK and Upadhyaya KC (2002) Molecular cloning and characterization of pentachlorophenol-degrading monooxygenase genes of Pseudomonas sp. from the chemostat. Biochem. Biophys. Res. Comm. 290: 770-774. |
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Thakur IS, Verma PK and Upadhyaya KC (2001) Involvement of plasmid in degradation of pentachlorophenol by Pseudomonas sp. From a chemostat. Biochem. Biophys. Res. Comm. 286: 109-113. |
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Verma PK and Upadhyaya KC (1998) A multiplex RT-PCR assay for analysis of relative transcript levels of different members of multigene families: Application to Arabidopsis calmodulin gene family. IUBMB Life 46(4): 699-706. |
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